खेल को खेल ही रहने दो जुनून मत बनाओ क्रिकेट में हार -जीत के बाद जो कुछ हो रहा है वह अच्छा नहीं

शिब्ली रामपुरी

भारत पाकिस्तान के बीच जो मैच हुआ जाहिर सी बात है उसमें एक टीम को हारना तो था ही. क्योंकि जब किसी अखाड़े में दो पहलवान उतरते हैं तो उनमें से एक तो पराजित होता ही है ऐसा ही मामला क्रिकेट का है. लेकिन अफसोस की बात सबसे बड़ी यह है कि अब क्रिकेट का खेल खेल नहीं बल्कि कुछ और ही बन गया है वह एक तरह का जुनून बनकर प्रशंसकों के दिलों दिमाग पर इस हद तक सवार हो चुका है कि ना तो जीत हजम हो पाती है और ना ही हार.

पाकिस्तान T20 वर्ल्ड कप में क्या जीता वहां युवाओं ने पागलपन की हद ही पार कर डाली और सड़कों पर उतरते हुए जमकर हुड़दंग मचाते हुए गोलियां चलाई और इन गोलियों से 12 लोग घायल हो गए जिसमें एक सब इंस्पेक्टर भी है. इतना ही नहीं पाकिस्तान के एक मंत्री तो इस जीत में इस हद तक जुनूनी हो गए कि उन्होंने इसे पूरी दुनिया के मुसलमानों की जीत बता डाला. जिस पर लोगों ने जहां नाराजगी जताई वहीं उस मंत्री के इस बयान का जमकर मज़ाक़ भी उड़ाया. जाहिर सी बात है जब एक मैच जो एक खेल है उसकी जीत पर अनाप-शनाप बयान दिए जाएंगे तो फिर लोग मजाक नहीं उड़ाएंगे तो और क्या करेंगे.

इस मैच में भारत के हारने के बाद क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों की जैसे शामत ही आ गई.सोशल मीडिया पर लोग उन पर टूट पड़े और ना जाने कैसे-कैसे मीम्स और कैसे-कैसे कटाक्ष उन पर किए गए. भारतीय टीम में शामिल एक क्रिकेट खिलाड़ी को तो उसके धर्म के आधार पर निशाना बनाया जाने लगा और लोगों ने न जाने उसे क्या क्या कह डाला.
लेकिन सलाम है उस इंसानियत पर कि जैसे ही कुछ घटिया मानसिकता रखने वाले लोगों ने क्रिकेटर मोहम्मद शमी को धर्म के आधार पर निशाना बनाया तो वैसे ही सचिन तेंदुलकर से लेकर राहुल गांधी और वीरेंद्र सहवाग तक शमी के साथ आ गए और उन्होंने शमी पर किए जा रहे बेतुके कटाक्ष और बयानबाजी की जमकर आलोचना की. यह सही है कि टीम के साथ और मैच के साथ लोगों के जज्बात जुड़ ही जाते हैं लेकिन यह भी पूरी तरह से गलत कहा जाएगा कि अगर टीम हार जाए तो फिर उसके विरोध में उतर कर अनाप-शनाप बयानबाजी की जाए और ना जाने किस किस खिलाड़ी को क्या-क्या बुरा भला कहा जाए.

क्रिकेट याद रखिए सिर्फ एक खेल है और खेल में जब दो टीमें उतरती हैं तो उनमें से एक ही की जीत होती है और एक का हारना लाज़मी है. ऐसे में आलोचना करने में भी कोई बुराई नहीं है और टीम में कैसे सुधार हो उस पर बात की जानी चाहिए ना कि हारने वाली टीम के खिलाड़ियों को अनाप-शनाप भला-बुरा कहा जाए और उनके तरह तरह के कार्टून बनाए जाएं और उन पर कटाक्ष किया जाए और किसी खिलाड़ी को उसके धर्म के आधार पर टारगेट किया जाए यह बेहद गलत है. क्रिकेट को खेल ही रहने दिया जाना चाहिए और उसे जुनून बनने से रोका जाए.