देहरादून में मनाई गई सर सैयद अहमद ख़ान की 209वीं जयंती
ओएनजीसी ऑफिसर्स क्लब में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षाविदों और गणमान्य व्यक्तियों ने की शिरकत, डॉ. रियाजुल हसन सिद्दीकी ने की निज़ामत
देहरादून। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के संस्थापक और महान शिक्षाविद् सर सैयद अहमद ख़ान की 209वीं जयंती के अवसर पर 24 अक्टूबर 2026 को देहरादून स्थित ओएनजीसी ऑफिसर्स क्लब में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, समाज सुधार और आधुनिक सोच के क्षेत्र में सर सैयद अहमद ख़ान के योगदान को याद करते हुए उनके विचारों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, देहरादून की कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) तबस्सुम नक़वी शामिल हुईं। विशिष्ट अतिथि के रूप में जिज्ञासा यूनिवर्सिटी, देहरादून के अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) मोहम्मद इरफान ख़ान तथा हिमालय कंपनी के निदेशक डॉ. एस. फ़ारूक़ ने शिरकत की। कार्यक्रम की निज़ामत डॉ. रियाजुल हसन सिद्दीकी ने की।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. साजिद जमाल, नफीस अहमद, इकबाल अहमद और इंजीनियर एम.सी. गुप्ता के सहयोग से किया गया।
सर सैयद अहमद ख़ान भारतीय उपमहाद्वीप की उन महान शख्सियतों में शामिल हैं, जिन्होंने शिक्षा को समाज की तरक्की और सामाजिक बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम माना। उन्होंने विशेष रूप से आधुनिक शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तार्किक सोच को बढ़ावा देने के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए। अलीगढ़ आंदोलन के माध्यम से उन्होंने मुस्लिम समाज में शैक्षिक जागरूकता पैदा करने और नई पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना के पीछे भी सर सैयद का यही सपना था कि भारतीय समाज के युवा आधुनिक ज्ञान, विज्ञान और उच्च शिक्षा हासिल करके देश और समाज की प्रगति में अपना योगदान दें। उनके विचार आज भी शिक्षा, सामाजिक सद्भाव और बौद्धिक विकास के संदर्भ में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
देहरादून में आयोजित इस जयंती समारोह का उद्देश्य सर सैयद अहमद ख़ान के शैक्षिक मिशन और उनके सुधारवादी विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को याद करना रहा।
कार्यक्रम में शिक्षाविदों और गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी ने सर सैयद के विचारों की आज के दौर में भी प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उनका जीवन इस बात की मिसाल है कि शिक्षा, दूरदर्शिता और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव की राह तैयार की जा सकती है।






