वक़्फ़ कानून से क्या सुधरेंगे गरीब मुसलमानों के हालात?

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वक़्फ़ कानून से क्या सुधरेंगे गरीब मुसलमानों के हालात?

(शिब्ली रामपुरी)

     वक़्फ़ के मामले में जो नया कानून सामने आया है भाजपा सरकार उसे गरीब मुसलमानों से जोड़ रही है और बार-बार सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि वक़्फ़ कानून से गरीब मुसलमानों का भला होगा.
केंद्रीय मंत्री रिजुजी भी बार-बार यह बोल रहे हैं कि वक़्फ़ कानून गरीब मुस्लिमो की भलाई के लिए लाया गया है इससे उनके लिए कल्याणकारी कार्य किए जाएंगे उनके हित में कल्याणकारी कार्यों पर वक़्फ़ का वह पैसा खर्च हो सकेगा कि जो अब तक किसी न किसी तरह से गरीब मुसलमानों तक पहुंच नहीं पा रहा था. अभी हाल ही में बोहरा समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उनको वक़्फ़ क़ानून के लिए बधाई दी और कहा कि यह वक्त की बड़ी जरूरत है.बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी जो लोकसभा सांसद हैं वह इस कानून के मामले को लेकर लगातार भाजपा सरकार पर हमलावर हैं और कई आरोप भी लगा रहे हैं.
यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी है कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर चुका है और मामले में अगली तारीख भी रखी गई है. सुप्रीम कोर्ट से इस मामले पर क्या निर्णय आएगा इस पर पूरे देश की नज़रें टिकी हुई हैं और जो कानून के विशेषज्ञ हैं वह भी अपनी-अपनी राय विभिन्न टीवी चैनलों के जरिए इस मामले पर रख रहे हैं पॉलिटिक्स करने वाले नेता भी इस मामले पर काफी कुछ बोल रहे हैं तो वहीं विद्वानों की ओर से भी इस मामले पर खुलकर बात की जा रही है.
वक़्फ़ संशोधन विधेयक जो कानून की शक्ल इख़्तियार कर चुका है उसमें क्या वाकई मुसलमान का हित छुपा हुआ है और क्या वक़्फ़ के मामले में आज तक मुसलमानों पर वह पैसा खर्च नहीं हो पा रहा था कि जो खर्च किया जाना चाहिए था जैसा कि भाजपा सरकार के मंत्री दावा कर रहे हैं कि अब ग़रीब मुसलमानों के कल्याण पर यह पैसा खर्च किया जाएगा. ऐसे लोगों की भी कोई कमी नहीं है कि जो यह कहते हैं कि देश में वक़्फ़ की इतनी संपत्ति है कि यदि उसका बंटाधार ना करके उससे जो पैसा आता है वह सही तरह से मुसलमानों की भलाई पर उनके कल्याण पर खर्च किया जाता तो शायद मुसलमानों की बदहाली इतनी नहीं होती कि जितनी बदहाली के शिकार आज मुसलमान हो रहे हैं. आर्थिक तौर पर मुस्लिम समाज को मजबूत बनाने के लिए और उनको शिक्षित बनाने के लिए अब वक़्फ़ कानून के सहारे की बात की जा रही है. वैसे यह तो एक कड़वी सच्चाई है कि जिसे किसी भी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि ऐसी बहुत सारी जमीन है कि जिन पर उनके मुत्वल्ली या दूसरे लोगों ने एक तरह से कब्जा कर रखा है और वह मुसलमानों के कल्याण के लिए उस पैसे को खर्च ही नहीं करते या फिर नाम मात्र दिखावे के लिए उस पैसे का इस्तेमाल मुसलमानो के लिए किया जाता है तो ऐसे लोगों पर तो कानूनी शिकंजा कसना तकरीबन तय माना जा रहा है. वक़्फ़ के मामले में प्रमुख तौर पर धार्मिक स्थलों का शुमार होता है और यह एक हकीकत है कि कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं बल्कि ऐसे धार्मिक स्थलों की बहुत बड़ी संख्या है कि जहां पर कार्य करने वाले लोगों को तो नाम मात्र की पगार मिलती है जबकि वहां से आमदनी का स्रोत बहुत ज्यादा है तो सवाल उठता है कि फिर यह पैसा जा किसकी जेब में रहा है.

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