नफरत के माहौल के बीच स्वतंत्रता दिवस का सही अर्थ

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नफरत के माहौल के बीच स्वतंत्रता दिवस का सही अर्थ

✒️ डॉ जमशेद उस्मानी,
संपादक. दैनिक गोल्डन टाइम्स

     आज हम स्वतंत्रता दिवस गौरव और उत्साह के साथ मना रहे हैं यह वह दिन है जब हमारे देश में आजादी हासिल की और अंग्रेजी हुकूमत की जंजीरों को तोड़ा, लेकिन आज जब लोकतंत्र पर सवाल उठ रहे हैं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश, असहमति की आवाज को दबाने की कोशिश और सबसे चिंता की बात समाज में बढ़ता नफरत और विभाजन का माहौल, तो सवाल उठता है कि ऐसे समय में हम स्वतंत्रता दिवस को कैसे मनाए ?

स्वतंत्रता केवल झंडा फहराना या परेड करने तक सीमित नहीं है यह विचारों की स्वतंत्रता, सवाल पूछने का अधिकार और समानता व न्याय पर आधारित समाज में जीने का अवसर है.
आज जब नफरत, जाति- धर्म के आधार पर विभाजन और आपसी अविश्वास बढ़ रहा है, हमें स्वतंत्रता दिवस को एक मौका बनाना चाहिए कि हम अपने आसपास प्रेम भाईचारे और आपसी सम्मान का वातावरण बनाएं, असली देशभक्त यह है जो लोगों को जोड़ती है तोड़ती नहीं,
लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब नागरिक न केवल जागरूक हो बल्कि एक दूसरे की स्वतंत्रता और अधिकारों का सम्मान भी करें, इस दिन हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम भेदभाव और अन्य के खिलाफ खड़े रहेंगे.
अगर हमें व्यवस्था या समाज में कुछ गलत दिखे तो उसका विरोध हिंसा, गाली गलौज या नफरत से नहीं बल्कि रचनात्मक तरीकों से करें, देशभक्ति नारे झंडों से आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभाने में है, कानून का पालन, जरूरतमंदों की मदद, सच बोलने का साहस और सभी के साथ समान व्यवहार, यह देशभक्ति है.

स्वतंत्रता दिवस केवल तिरंगे की शान का दिन नहीं बल्कि यह हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र और एकता हमारी सबसे बड़ी ताकत है अगर आज समाज में लोकतांत्रिक मूल्यों पर खतरा है तो यह दिन हमें फिर से उन्मूलू को अपने और फैलाने का अवसर देता है.
आई आज हम संकल्प लें की स्वतंत्रता दिवस पर सिर्फ तिरंगा ही नहीं बल्कि प्यार, एकता और लोकतांत्रिक का संदेश भी पूरे दिल से लहराएंगे.

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