Monday, October 12, 2026
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उर्दू अदब की दुनिया में मातम, उस्ताद शायर ज़िया नेहटौरी नहीं रहे

साहित्यकारों और प्रशंसकों ने दी श्रद्धांजलि, मरणोपरांत सम्मान देने की उठी मांग

गोल्डन टाइम्स

देहरादून (अमानुल्लाह उस्मानी) उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में उर्दू अदब की छह दशकों से अधिक समय तक खिदमत करने वाले उस्ताद शायर, फाइन आर्ट के जाने-माने चित्रकार और प्रोग्रेसिव कम्युनिटी के संरक्षक ज़िया नेहटौरी का सोमवार सुबह लंबी बीमारी के बाद मेहूंवाला में निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। उनके इंतकाल की खबर से साहित्यिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी सादगी, खुद्दारी, आपसी भाईचारे और साहित्यिक मूल्यों के साथ गुजारी। सोमवार शाम देहरादून में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
ज़िया नेहटौरी केवल एक शायर ही नहीं, बल्कि साहित्य, कला और सामाजिक सद्भाव के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखने वाली शख्सियत थे। उन्होंने छह दशकों से अधिक समय तक देहरादून में उर्दू और हिंदी साहित्य को समर्पित रहकर काम किया। अपनी रचनात्मक प्रतिभा, मिलनसार स्वभाव और नए साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने की भावना के कारण वह साहित्यिक हलकों में विशेष सम्मान रखते थे।
साहित्य के साथ-साथ ज़िया नेहटौरी पेशे से प्रेस फोटोग्राफर और फाइन आर्ट के जाने-माने चित्रकार भी थे। उन्होंने अपनी कला और हुनर के माध्यम से समाज से गहरा जुड़ाव बनाए रखा। धामावाला स्थित कमल मार्केट में उन्होंने लगभग 40 वर्षों तक अपना फोटो स्टूडियो संचालित किया। इस दौरान उन्होंने जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क फोटोग्राफी संबंधी सेवाएं भी दीं।
उनकी यह सेवा भावना उनके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा थी। वह कला को केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि समाज के साथ जुड़ने और लोगों की मदद करने का माध्यम भी मानते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद दूसरों के काम आने का उनका जज्बा उन्हें लोगों के बीच एक अलग पहचान देता था।
ज़िया नेहटौरी के व्यक्तित्व का सबसे उल्लेखनीय पहलू उनकी सादगी और खुद्दारी थी। उत्तराखंड भाषा संस्थान के सदस्य और उत्तराखंड उर्दू अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष, अंतरराष्ट्रीय शायर अफजल मंगलोरी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि ज़िया साहब ने जीवन पूरी खुद्दारी और आत्मसम्मान के साथ गुजारी।
अफजल मंगलोरी ने कहा कि ज़िया नेहटौरी जैसे लोग समाज की वह पूंजी होते हैं, जिनकी सेवाओं का मूल्य केवल उनके जीवनकाल तक सीमित नहीं रहता। उन्होंने मुझ जैसे अनेक शायरों और कवियों को आगे बढ़ने तथा अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए प्रोत्साहित किया। साहित्यकारों को आगे बढ़ाने में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि ज़िया नेहटौरी की साहित्यिक और सामाजिक सेवाओं को देखते हुए उन को मरणोपरांत सम्मान दिलाने के लिए वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर निवेदन करेंगे। उनका मानना है कि ऐसे साहित्यकारों और समाजसेवियों के योगदान को उचित पहचान मिलनी चाहिए, जिन्होंने अपना पूरा जीवन साहित्य और समाज की सेवा में लगा दिया।
ज़िया नेहटौरी प्रोग्रेसिव कम्युनिटी के संरक्षक थे। उनके निधन पर संस्था के पदाधिकारियों और सदस्यों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे साहित्यिक और सामाजिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
प्रोग्रेसिव कम्युनिटी के अध्यक्ष डॉ. रियाजुल हसन सिद्दीकी, उपाध्यक्ष खालिद फारूकी, अशरफ हाशमी और साबिर सिद्दीकी, जनरल सेक्रेटरी डॉ. जमशेद उस्मानी, कन्वीनर सैयद सुहैल जमीर एडवोकेट, आरिफ सिद्दीकी, एम.एम. सिद्दीकी, एडवोकेट सैयद मुबाशिर हुसैन, एडवोकेट दानिश, एडवोकेट फरजानुल्लाह उस्मानी गजाली, सैयद ओवैस थानवी और आसिफ थानवी सहित अन्य लोगों ने उनके निधन पर शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं।
संस्था के सदस्यों ने कहा कि ज़िया नेहटौरी का व्यक्तित्व सादगी, भाईचारे और साहित्यिक सेवा की मिसाल था। उनका जाना केवल एक वरिष्ठ शायर का बिछुड़ना नहीं, बल्कि उस पीढ़ी के एक ऐसे प्रतिनिधि का विदा होना है, जिसने साहित्य को समाज से जोड़ने और लोगों के बीच आपसी सद्भाव बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ज़िया नेहटौरी के निधन पर विभिन्न साहित्यिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भी दुख व्यक्त किया। शायर अंबर खरबंदा, असलम खतौलवी, मोनिका मंतशा, डोली डबराल, अफजल मंगलोरी, विजय द्रोणी, आर.ए. खान और दर्द गढ़वाली सहित अनेक लोगों ने शोक संवेदनाएं प्रकट करते हुए दिवंगत आत्मा के लिए दुआ की।
उनके निधन से देहरादून की उस साहित्यिक परंपरा को गहरा आघात पहुंचा है, जिसमें उर्दू और हिंदी के रचनाकार एक-दूसरे के साथ मिलकर साहित्य और सांस्कृतिक सद्भाव को आगे बढ़ाते रहे हैं। ज़िया नेहटौरी ने अपने लंबे साहित्यिक सफर में इस साझा विरासत को मजबूत करने का काम किया।
ज़िया नेहटौरी निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। साहित्यिक और सामाजिक जगत के लोगों ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें इस कठिन समय में धैर्य प्रदान करने की कामना की।
ज़िया नेहटौरी का जीवन इस बात की मिसाल रहा कि व्यक्ति अपनी आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद अपने आत्मसम्मान, कला और सेवा भावना के बल पर समाज में सम्मानजनक स्थान बना सकता है। उर्दू-हिंदी साहित्य की सेवा, चित्रकला, फोटोग्राफी और नए रचनाकारों को प्रोत्साहन देने के उनके प्रयास लंबे समय तक याद किए जाते रहेंगे। उनके निधन के साथ देहरादून ने एक ऐसे साहित्यसेवी को खो दिया है, जिसकी पहचान उसकी रचनात्मकता के साथ-साथ उसकी इंसानियत, सादगी और खुद्दारी से भी थी।

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