देहरादून में नफरत फैलाने वालों पर कार्रवाई की मांग

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स्पीच देने वालों पर तत्काल एफआईआर और बैरागीवाला हत्याकांड के सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग

देहरादून में लगातार बढ़ रही सांप्रदायिक नफरत और हेट स्पीच की घटनाओं को लेकर गुरुवार को विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी आशीष चौहान और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोवाल से मुलाकात कर कड़ी कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जिले में नफरत फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो जनता सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होगी।

प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों को बताया कि जिले में छह से सात ऐसे लोग लगातार सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया के माध्यम से सांप्रदायिक घृणा फैलाने का काम कर रहे हैं। उनके भाषणों और वीडियो फुटेज में खुलेआम भड़काऊ बयान दिखाई दे रहे हैं, लेकिन पुलिस द्वारा उनके खिलाफ नामजद मुकदमे दर्ज करने के बजाय अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है, जिससे ऐसे लोगों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।

जिलाधिकारी आशीष चौहान ने कहा कि देहरादून में उनकी यह पहली नियुक्ति है और वे पूरे मामले की जानकारी लेकर पुलिस प्रशासन से ऐसे तत्वों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराएंगे। वहीं एसएसपी प्रमेन्द्र डोवाल ने बताया कि एक व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है तथा अन्य आरोपितों के विरुद्ध भी उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जल्द कार्रवाई की जाएगी।

प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों को सौंपे ज्ञापन में बैरागीवाला में विनोद कुमार हत्याकांड के सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई। साथ ही आरोप लगाया कि इस घटना के बाद कुछ सांप्रदायिक तत्वों ने पूरे इलाके का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, पुलिस पर पथराव किया गया तथा भड़काऊ और घृणा फैलाने वाले भाषण देकर समाज में तनाव पैदा करने का प्रयास किया गया।

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ व्यक्तियों द्वारा मुस्लिम समुदाय और धार्मिक स्थलों को लेकर अत्यंत आपत्तिजनक एवं उकसाऊ बयान दिए गए, जो सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती हैं। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि ऐसे मामलों में कानून के अनुसार तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।

प्रतिनिधियों ने अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश की भी याद दिलाई, जिसमें उत्तराखंड से जुड़े एक मामले में न्यायालय ने स्पष्ट कहा था कि हेट स्पीच के मामलों में पुलिस को शिकायत का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। उनका आरोप था कि हाल की घटनाओं में भड़काऊ बयान देने वालों की पहचान स्पष्ट होने के बावजूद पुलिस द्वारा अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

ज्ञापन सौंपने वालों में उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत, निर्मला बिष्ट, विमला कोली और मंजू बलौदी, उत्तराखंड इंसानियत मंच के हरिओम पाली एवं त्रिलोचन भट्ट, भारत ज्ञान विज्ञान समिति के कमलेश खंतवाल, चेतना आंदोलन के राजेन्द्र शाह, सीपीआई (माले) के इंद्रेश मैखुरी, सीपीएम के राजेन्द्र पुरोहित, कांग्रेस की सुजाता पॉल, पवन क्षेत्री, तलाफत हुसैन, मनीष, अलमाशुद्दीन सिद्दीकी सहित अनेक सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


 

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